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पटना दूरदर्शन के पूर्व निदेशक पुरुषोत्तम नारायण सिंह कोरोना के कारण गुजर गये,इकलौता बेटा आलाप भी नहीं रहा

पत्रकार अरूण पांडे चले गए। बंगाल चुनाव की भेंट चढ़ गए। वहीं से कोरोना लेकर आये--ओंकारेश्वर पांडे

 

मेरे मित्र, पड़ोसी और पटना दूरदर्शन के पूर्व निदेशक पुरुषोत्तम नारायण सिंह नहीं रहे।

I am going…. ये तीन शब्द आज मेरे वाट्सएप्प पर तीन बजकर तिरपन मिनट पर चमके, तो कलेजा सिहर उठा। मैसेज पी एन सिंह का था। तत्काल फोन वापस लगाया तो उधर से चिर-परिचित आवाज़ पीएन सिंह की थी। लड़खड़ाती आवाज़ में बोले – सबको बता दीजिए पांडे जी, मैं जा रहा हूं। मैं कुछ कहता इससे पहले, फोन काट दिया और फिर नहीं उठाया….. देर शाम दिल का दौरा पड़ा और रात 11.53 पर उनके निधन की पुष्टि हो गयी।

करीब 10 दिनों से वे कोरोना से पीड़ित थे।हालत गंभीर हुुई तो झज्जर एम्स में भर्ती कराया गया। हर संभव ईलाज हुआ। लेकिन चार दिन पहले जब उनका इकलौता बेटा आलाप कोरोना के कारण गुजर गया, तो वे हिम्मत हार गये।

बहुआयामी प्रतिभा के धनी पी एन सिंह दूरदर्शन के गलियारे में सुपरिचित नाम तो थे ही, वह एक कवि, संगीतकार, नाटककार, शोधकर्ता,प्रस्तुतकर्ता / एंकर, और सबसे बढ़कर एक मृदु भाषी इंसान थे। दूरदर्शन में एक निर्माता और निर्देशक होने के साथ साथ टेलीविजन प्रोडक्शन एंड मैनेजमेंट के अलावा चैनल प्रबंधक के रूप में भी उन्होंने कुल मिलाकर 26 साल तक काम किया और इस दौरान विभिन्न प्रारूपों में 2000 से अधिक टीवी कार्यक्रमों का निर्माण किया।

वे  डीडी-नेशनल, डीडी-मेट्रो और डीडी-भारती में वरिष्ठ प्रबंधन के पद पर रहे। दूरदर्शन का रांची केंद्र और पटना केंद्र खोला। 2003 से मीडिया मार्केटिंग में भी रहे और 2003 में डीडी के राजस्व को 21 करोड़ रुपये से बढ़ाकर
2010 में Rs.260 करोड़ तक का अद्भुत ग्राफ पहुँचाने में योगदान रहा।

 

दो साल पहले डी डी से रिटायर होने के बाद से वे कुछ फिल्म निर्माण और प॔ सुरेश नीरव Suresh Neerav Jai Ho के अखिल भारतीय सर्व भाषा साहित्य समन्वय समिति के मंच से जुड़कर साहित्य सेवा में लगे हुए थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, बहू और सवा साल की एक पोती है। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें। 🙏

अरूण पांडे चले गए। बंगाल चुनाव की भेंट चढ़ गए। वहीं से कोरोना लेकर आये। राष्ट्रीय सहारा में हमने करीब 17 साल तक साथ काम किया था। आप विभांशु दिव्याल जी के साथ हस्तक्षेप की पहली टीम के अगुआ थे। ग॓भीर और शोधपरक पत्रकारिता हिंदी में भी हो सकती है, यह हस्तक्षेप ने करके दिखाया। प्रिंट के बाद टेलीविजन पत्रकारिता की गुणवत्ता सुधारने में भी आपका अहम योगदान रहा। पहले सहारा टीवी और फिर न्यूज24, इंडिया टीवी समेत कई अन्य चैनलों में आपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईश्वर आपकी आत्मा को शान्ति दें और आपके परिजनों को यह असह्य दुख सहने की शक्ति। विनम्र श्रद्धांजलि अरुण जी।

 

ENDS

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